फिर मिलने का कह भैया चले गये| निम्मी को लगा कि भैया को उसकी बात भीतर तक कचोट गयी होगी| पर बिना कहे चारा क्या था?भैया को दूसरा पहलू भी तो मालूम पड़ना ही चाहिए था| भैया को बुरा न लगे ये सोच हर बार बात दबा जाती हैं|
निम्मी की मेहनत रंग लायी और उसे अपनी जेब के मुताबिक घर मिल गया हैं|अनुप ने पूरा साथ दिया निम्मी का| इस घर देखने -दिखाने के चक्कर ने निम्मी और अनूप को इतना करीब ला दिया कि अनूप ने आज उसे हमसफर बना लेने की बात उठायी| निम्मी ने अपनी मजबूरी बतायी तो अनूप सहर्ष उनकी जिम्मेदारी ले लेने को तैयार हो गया|
आज निम्मी अनूप को उसी जगह पा रही हैं जहाँ एक दिन भैया खड़े थे| आज उसे भैया की मजबूरी का अहसास हूआ|
निम्मी ने माँ-पापा को अनूप के बारे में सब बता दिया हैं| माँ को भी शायद वही अहसास हूआ हैं जो निम्मी को हूआ है|भैया किस आजाब से गुजरे होगे? सुमिञा का मन अपने बेटे की तरफ से काफी हद तक पिघल गया हैं|
" बेटे का मन नहीं हूआ कि माँ-पापा से एक बार मिल ही ले|" सुमिञा ने मन आखिर खोल ही दिया उस दिन निम्मी के आगे|
निम्मी ने अभी तक माँ को ये नहीं बताया कि भैया और वो एक ही शहर में हैं|निम्मी ने मन बना ही लिया हैं कि एक बार तो माँ और भैया का आमना-सामना करवा ही देगी| बाकी दोनो को अपने दायरो से निकलना ही पड़ेगा|
भैया को भी निम्मी ने अनूप के बारे में सब बता दिया| अनुप से मिल भैया ने पूरी तस्सली कर ली हैं|
दोनो तरफ के अभिभावक एक -दूसरे से मिल सारी बाते तय कर चुके हैं| निम्मी को अपने सास-ससूर बहूत सुलझे हूए मिले हैं| और निम्मी ने भी तय किया हैं कि वो भाभी वाली भूमिका कभी नहीं निभायेगी| और पूरे परिवार को साथ लेकर चलेगी| रिश्तो की गरमाहट क्या होती हैं ये पिछले कुछ सालो बखुबी समझ गयी हैं निम्मी|
आज निम्मी बहूत खुश हैं| भैया ने इतने सालो की दूरी पाट लेने का मन पक्का कर लिया हैं| सुमिञा को निम्मी ने सहज हो भैया से मिलने की बात की हैं|
" अच्छा मेरी माँ, सुमिञा ने हंस कर निम्मी के सर पर एक धौल जमायी हैं|
भैया आ चुके हैं| जो इतने दिनो की दूरी थी वो आँसूओ के रास्ते बही जा रही हैं| भैया ने माँ-पापा का सारा भार अपने ऊपर ले लिया हैं| हलांकि उन्होने निम्मी के देखे घर में ही जाने का निर्णय लिया हैं पर हठ कर भैया ने उसका किराया देने का फैसला किया हैं|
आज का दिन कितना मधूर हैं|रिश्तो में जमी धूल साफ हो गयी हैं| आज का दिन नया सवेरा लेकर आया हैं| सब कुछ साफ, स्वस्छ|
इति
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Anju you write marvelous story.
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