दीना बाबू के अपने पास होने का एहसास पिताजी को इतने दिनो बाद हुआ|एक जो पराएपन की गंध आती थी वो आज नहीं थी|जैसे दीना बाबू है तो सब ठीक ही होगा | कुछ ऐसे भाव तिर आए पिताजी के| अपनो का अपनापन कितना सबंल दे जाता हैं इसका एहसास दोनो बाप-बेटे ने किया होगा|
तभी न जब पिताजी ने कहा कि सारे कागजात दुरुस्त हैं या नहीं, ये जाँच ले दीना बाबू तो सारे कागजात उसी समय खोल कर बैठ गये दीना बाबू|वैसे भी उनकी किसी बात को टाल लेना दीना बाबू से आज तक न हूआ|
चच्चा अपने हिसाब से पूरा काम दुरुस्त कर गये थे कि गर कभी कागजात सरसरी तौर पर देखे जाए तो कोई कमी नजर न आए|पर कहते हैं न कि अपराधी चाहे जितनी सफाई से काम करे सबुत छोड़ ही जाता हैं यहाँ भी कुछ यही हुआ|दीना बाबू का काम पक्का होता था|इतने दिन साल यही काम तो करते आ रहे थे| छोटी से छोटी गल्ती उनकी नजरो से बच न पाती | जो यहाँ भी पेपरो को जब बारीकी से टटोला तो सन्न रह गये| चच्चा ने उन लोगो को चूना लगाने में कोई कसर न छोड़ी थी|
इस काम में किसी अपने आदमी ने पूरा साथ दिया था नहीं तो हिसाब को ढांकने छुपाने का काम इतना पक्का न होता|ऐसी लगभग सारी जमीने जिनमें पिताजी का दौरा बरसो नहीं हुआ था चच्चा ने अपने नाम करवा ली थी|पिताजी तक वही बात आती जो चच्चा बता जाते| आज भी अगर कागजात टटोले न जाते तो कभी पता ही नहीं लगता|
जब पिताजी को ही खबर न हुई तो अम्मा को क्या खबर की उनके पीठ पर उनके अपने ही खजंर घोप रहे हैं| गर अम्मा को तनिक आहट हुई होती तो तभी न नकेल कस देती चच्चा की|
पिताजी भी हकबकाये से बैठे रह गये| इतना धोखा?सारी बात जानने के लिए दीना बाबू का देखने लगे| दीना बाबू भी तय कर चुके थे कि पिताजी तक पूरी सच्चाई पहुँचाएगे ताकि आगे के लिए खबरदार रहे|
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