अब आपको आगे ले चलती हूँ|आगे चलने पर ऊँची दीवारो से घिरा खुला सेहन हैं|बीचो-बीच गोल घेरे में रानियों के नहाने के लिए ताल बना हैं| इस ताल का नाम जितना दिलचस्प हैं इससे जुड़ी कहानी भी उतनी ही दिलचस्प हैं|
इस फव्वारे का नाम 'बिन बादल बरसात' हैं| है न लीक से हट कर ये नाम?
जैसा कि पहले बता चुकी हूँ कि रानियों के इसरार के चलते रादा ने फतेहसागर झील से यहाँ तक सुरंग खुदवा पानी का इंतजाम किया था|
इस फव्वारे में ताल के बीचो-बीच नक्काशीदार मीनारो पर खड़ा फव्वारा बना हैं| मीनारो के बीच से पाइप मीनार और गुबंद के बीच तक खीचां गया हैं|
पानी चलने पर मीनारो और गुबंद के बीच से चारो तरफ से निकलता जो पानी ताल में गिरता हैं वो बरसात होने सा आभास कराता हैं|
इसी चारदीवारी के अंदर रानियों के लिए एक'green room' भी बनाया गया था| ऊँची चारदीवारी इसलिए की बाहर के किसी भी इंसान की नजर इस ताल पर न पड़े|
वैसे भी इस बाड़ी में राजा के अलावा किसी भी आदमी का प्रवेश वर्जित था|
इस फव्वारे से निकल जो लंबी सी पगड़डी चलती हैं उसके दोनो तरफ फूलो के पौधे लगे हैं|आगे बांयी तरफ मनोरम' सावन भादो' फव्वारा आता हैं| आप लोगो को इस नाम से अंदाज हो गया होगा|
ये फव्वारा ज्यादातर गर्मियों एंव सावन के महीने में उपयोग किया जाता था| इसमें चारो ओर गोलाई में घने पौधे लगाए गये थे| इसी के आगे गोलाई में ही छोटे फव्वारे लगाए गये थे| जब इनसे निकलता पानी पौधो में गिरता था तो'rain forest' सा आभास होता था|
इन फव्वारो के आगे ठोस जमीन बनी थी और बीचो बीच एक बड़ा फव्वारा बना था| जिसका पानी १० फीट से ऊँचा जाता था| इसमें चारो कोनो में आम का पेड़ लगा था जो गर्मियों के मौसम में आम के साथ प्राकृतिक वातानूकुलन का भी काम करता था| इन्ही आम के पेड़ो में सावन के झुले पड़ा करते थे| और एकदम उत्सव सा माहौल रहता था|
आगे चल आता था ' कमल तलाई'|नाम के अनुसार ये 'तलाई' कमल के फूलो से अटी पड़ी रहती थी|
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It seems as Reader is accompanying the writer very enchanting.
जवाब देंहटाएंIt seems as Reader is accompanying the writer very enchanting.
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